Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 84 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 84

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 84
Shloka
इदं शरणं अज्ञानां इदं एव विजानताम्। इदं अन्विच्छतां स्वर्गं इदं आनन्त्यं इच्छताम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो विविदिषा अर्थात् जानने की इच्छा करके गौण संन्यास लेवे, वह भी विद्या का अभ्यास, सत्पुरुषों का संग, योगाभ्यास और ओंकार का जप और उसके अर्थ परमेश्वर का विचार भी किया करे । (इदम् अज्ञानां शरणम्) यही अज्ञानियों का शररण अर्थात् गौणसंन्यासियों और (इदम् एव विजानताम्) यही विद्वान् संन्यासियों का (इदं स्वर्गम् इच्छताम्) यही सुख का खोज करने हारे, और (इदम् अनन्त्यम् इच्छताम्) यही अनन्तः सुख की इच्छा करने हारे मनुष्यों का आश्रय है ॥८४॥