Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 72 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 72

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 72
Shloka
प्राणायमैर्दहेद्दोषान्धारणाभिश्च किल्बिषम्। प्रत्याहारेण संसर्गान्ध्यानेनानीश्वरान्गुणान्॥

Bhashya

Meaning
इसलिए संन्यासी लोग (प्राणायामै: दोषान्) प्राणायामों से दोषों को (धारणाभिः किल्विषम्) धारणाओं से अन्तःकरण के मैल को (प्रत्याहारेण संसर्गान्) प्रत्याहार से संग से हुए दोषों (च) और (ध्यानेन अनीश्वरान् गुरणान्) ध्यान से अविद्या, पक्षपात आदि अनीश्वरता के दोषों को छुड़ाके पक्षपातरहित आदि ईश्वर के गुणों को धारण कर (दहेत्) सव दोषों को भस्म कर देवे॥७२॥