Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 70 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 70

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 70
Shloka
प्राणायामा ब्राह्मणस्य त्रयोऽपि विधिवत्कृताः। व्याहृतिप्रणवैर्युक्ता विज्ञेयं परमं तपः॥

Bhashya

Meaning
(ब्राह्मणस्य व्याहृति -प्रणवैः युक्ताः विधिवत्कृताः प्राणायामाः) ब्राह्मरण अर्थात् ब्रह्मवित् संन्यासी को उचित है कि ओंकारपूर्वक सप्तव्याहृतियों से विधिपूर्वक प्राणायाम जितनी शक्ति हो उतने करे (त्रयः अपि) परन्तु तीन से तो न्यून प्राणायाम कभी न करे (परमं तपः विज्ञेयम्) यही संन्यासी का परम तप है ॥७०॥