Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 66 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 66

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 66
Shloka
दूषितोऽपि चरेद्धर्मं यत्र तत्राश्रमे रतः। समः सर्वेषु भूतेषु न लिङ्गं धर्मकारणम्॥

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Meaning
(दूषितः अपि धर्मं चरेत्) यदि संन्यासी को मूर्ख संसारी लोग निन्दा आदि से दूषित वा अपमान भी करें तथापि धर्मं ही का आचरण करे (यत्र तत्र मे रतः) ऐसे ही अन्य ब्रह्मचर्याश्रमादि के मनुष्यों को करना उचित है (सर्वेषु भूतेषु समः) सव प्राणियों में पक्षपात रहित होकर समबुद्धि रखे, इत्यादि उत्तम काम करने ही के लिये संन्यासाश्रम का विधि है, किन्तु (लिङ्ग धर्मकारणं न) केवल दण्डादि चिह्न धारण करना ही धर्म का कारण नहीं है ॥६६॥