Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 64 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 64

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 64
Shloka
अधर्मप्रभवं चैव दुःखयोगं शरीरिणाम्। धर्मार्थप्रभवं चैव सुखसंयोगं अक्षयम्॥

Bhashya

Meaning
(शरीरिणां दुःखयोगं अधर्मप्रभवं एव) यह निश्चित है कि प्राणियों को सभी प्रकार के दुःख अधर्म से ही मिलते हैं (च) और (अक्षयं सुखसंयोगं धर्मार्थप्रभवम् एव) अक्षयसुखों की प्राप्ति केवल धर्म से ही होती है। इसको भी विचारे॥६४॥