Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 62 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 62

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 62
Shloka
विप्रयोगं प्रियैश्चैव संयोगं च तथाप्रियैः। जरया चाभिभवनं व्याधिभिश्चोपपीडनम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(च) और (प्रिय: विप्रयोगम्) प्रियजनों से वियोग हो जाना (तथा अप्रियैः संयोगम्) तथा शत्रुओं से संपर्क होना और उससे फिर कष्टप्राप्ति होना (च) और (जरया अभिभवनम्) बुढ़ापे से ग्राक्रान्त होना (च) तथा (व्याधिभि: उपपीडनम्) रोगों से पीड़ित होना (च) और (अस्मात् देहात् उत्क्रमरणम्) फिर इस शरीर से जीव का निकल जाना (गर्भे पुनः संभवम्) गर्भ में पुनः जन्म लेना (च) और इस प्रकार (अस्य अन्तरात्मनः) इस जीव का (योनिकोटिसहस्रेषु सृती:) करोड़ोंसहस्रों अर्थात् अनेकों योनियों में आवागमन होना- इनको विचारे और इनके कष्टों को देखकर मुक्ति में मन लगावे॥६२॥