Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 61 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 61

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 61
Shloka
अवेक्षेत गतीर्नॄणां कर्मदोषसमुद्भवाः। निरये चैव पतनं यातनाश्च यमक्षये॥

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Meaning
(कर्मदोषसमुद्भवाः नृणां गतीः) कर्मों के दोष से होने वाली मनुष्यों की बुरी गतियों (च) और (निरये पतनम्) कष्टों का भोगना (च) तथा (यमक्षये यातनाः) मृत्यु के समय होने वाली पीड़ाओं को (अवेक्षेत) विचारे और विचारकर मुक्ति के लिए प्रयत्न करे॥६१॥