Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 58 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 58

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 58
Shloka
अभिपूजितलाभांस्तु जुगुप्सेतैव सर्वशः। अभिपूजितलाभैश्च यतिर्मुक्तोऽपि बध्यते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तु) और (अभिपूजितलाभान्) बहुत अधिक आदर-सत्कार से मिलने वाली भिक्षा या अन्य लाभों से (सर्वशः एव जुगुप्सेत) सर्वथा उपेक्षा बरते, क्योंकि (अभिपूजितलाभः मुक्तः अपि यतिः बद्धयते) बहुत अधिक आदर-सत्कार से प्राप्त होने वाली भिक्षा से अथवा लाभों से मुक्त संन्यासी भी विषयों के बंधन में फंस जाता है॥५८॥से