Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 57 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 57

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 57
Shloka
अलाभे न विषदी स्याल्लाभे चैव न हर्षयेत्। प्राणयात्रिकमात्रः स्यान्मात्रासङ्गाद्विनिर्गतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अलाभे विषादी न स्यात्) भिक्षा के न मिलने पर दुःखी न हो (च) और (लाभेन हर्षयेत्) मिलने पर प्रसन्नता अनुभव न करे (मात्रासंगात् विनिर्गतः) अधिक-कम, अच्छी-बुरी भिक्षा की मात्रा का मोह न करके अर्थात् जैसी भी भिक्षा मिल जाये उसे ग्रहण करके (प्राणयात्रिकमात्र: स्यात्) केवल अपनी प्राणयात्रा को चलाने योग्य भिक्षा प्राप्त कर ले॥५७॥