Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 52 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 52

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 52
Shloka
क्ल्प्तकेशनखश्मश्रुः पात्री दण्डी कुसुम्भवान्। विचरेन्नियतो नित्यं सर्वभूतान्यपीडयन्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(क्लृप्त-केश-नख- श्मश्रुः) केश, नख, दाढ़ी, मूंछ को छेदन करवावे (पात्री दण्डी कुसुम्भवान्) पात्र, दण्ड और कुसुम्भ आदि से रंगे हुए वस्त्रों को ग्रहण करके (नियतः) निश्चितात्मा (सर्वभूतानि अपीडयन्) सब भूतों को पीड़ा न देकर (विचरेत्) सर्वत्र विचारे ॥५२॥