Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 48 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 48

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 48
Shloka
क्रुद्ध्यन्तं न प्रतिक्रुध्येदाक्रुष्टः कुशलं वदेत्। सप्तद्वारावकीर्णां च न वाचं अनृतां वदेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(क्रुद्धयन्तं) जब कहीं उपदेश वा संवादादि में कोई संन्यासी पर क्रोध करे अथवा (आकृष्ट:) निन्दा करे तो संन्यासी को उचित है कि (न प्रतिक्रुद्धय त्) उस पर आप क्रोध न करे (कुशलं वदेत्) किन्तु सदा उसके कल्याणार्थं उपदेश ही करे (च) और (सप्तद्वार+अवकीर्णां वाचम् अभृतां न वदेत्) मुख के, दो नासिका के, दो आंख के और दो कान के छिद्रों में बिखरी हुई वाणी को किसी मिथ्या कारण से कभी न बोले॥४८॥