Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 45 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 45

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 45
Shloka
नाभिनन्देत मरणं नाभिनन्देत जीवितम्। कालं एव प्रतीक्षेत निर्वेशं भृतको यथा॥

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Meaning
(न जीवितं अभिनन्देत) न तो अपने जीवन में आनन्द और (न मरणम् अभिनन्देत) न मृत्यु में दुःख माने, किन्तु (यथा) जैसे (भृतक: निर्देशम्) क्षुद्र भृत्य अपने स्वामी की आज्ञा की बाट देखता रहता है वैसे ही (कालम् एव प्रतीक्षेत) काल और मृत्यु की प्रतीक्षा करता रहे॥४५॥