Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 43 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 43

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 43
Shloka
अनग्निरनिकेतः स्याद्ग्रामं अन्नार्थं आश्रयेत्। उपेक्षकोऽसंकुसुको मुनिर्भावसमाहितः॥

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Meaning
वह संन्यासी (अनग्निः) आहवनीयादि अग्नियों से रहित (अनिकेत:) और कहीं अपना स्वाभिमत घर भी न बांधे (अन्नार्थं ग्रामम् आश्रयेत्) और अन्नवस्त्र आदि के लिए ग्राम का आश्रय लेवे (उपेक्षकः) बुरे मनुष्यों की उपेक्षा करता (असंकुसुक:) और स्थिरबुद्धि (मुनिः) मननशील होकर (भावसमाहितः) परमेश्वर में अपनी भावना का समाधान करता हुआ (स्यात्) विचरे॥४३॥