Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 41 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 41

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 41
Shloka
अगारादभिनिष्क्रान्तः पवित्रोपचितो मुनिः। समुपोढेषु कामेषु निरपेक्षः परिव्रजेत्॥

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Meaning
(कामेषु समुपोढेषु निरपेक्ष:) जव सब कामों को जीत लेवे और उनकी अपेक्षा न रहे (पवित्र + उपचितः) पवित्रात्मा और पवित्रान्तःकरण (मुनिः) मननशील हो जावे (आगारात् अभिनिष्क्रान्तः) तभी गृहाश्रम से निकलकर(परिव्रजेत्) संन्यासाश्रम का ग्रहण करे अथवा ब्रह्मचर्य ही से संन्यास का ग्रहरण कर लेवे॥४१॥