Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 4 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 4

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 4
Shloka
अग्निहोत्रं समादाय गृह्यं चाग्निपरिच्छदम्। ग्रामादरण्यं निःसृत्य निवसेन्नियतेन्द्रियः॥

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Meaning
जब गृहस्थ वानप्रस्थ होने की इच्छा करे तब (अग्निहोत्रं च गृह्यम अग्निपरिच्छदं समादाय) अग्निहोत्र को सामग्री सहित लेके (ग्रामात् निःसृत्य) गांव से निकल (अरण्यं जितेन्द्रियः निवसेत्) जंगल में जितेन्द्रिय होकर निवास करे॥४॥