Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 38 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 38

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 38
Shloka
प्राजापत्यं निरुप्येष्टिं सर्ववेदसदक्षिणाम्। आत्मन्यग्नीन्समारोप्य ब्राह्मणः प्रव्रजेद्गृहात्॥

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Meaning
(प्राजापत्यां सर्ववेदसदक्षिणम् इष्टिं निरूप्य) प्रजापति परमात्मा की प्राप्ति के निमित्त प्राजापत्येष्टि कि जिसमें यज्ञोपवीत और शिखा का त्याग किया जाता है (अग्नीन् आत्मनि समारोप्य) हवनीय, गार्हपत्य और दाक्षिणात्य संज्ञक अग्नियों को आत्मा में समारोपित करके (ब्राह्मरणः गृहात् प्रव्रजेत्) ब्राह्मण गृहाश्रम से ही संन्यास लेवे॥३८॥