Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 26 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 26

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 26
Shloka
अप्रयत्नः सुखार्थेषु ब्रह्मचारी धराशयः। शरणेष्वममश्चैव वृक्षमूलनिकेतनः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(सुखार्थेषु अप्रयत्नः) शरीर के सुख के लिए अतिप्रयत्न न करे, किन्तु (ब्रह्मचारी) ब्रह्मचारी अर्थात् अपनी स्त्री साथ हो तथापि उससे विषयचेष्टा कुछ न करे (धराशयः) भूमि में सोवे (शरणे + अममः+च+एव) अपने आश्रित वा स्वकीय पदार्थों में ममता न करे (वृक्षमूलनिकेतनः) वृक्ष के मूल में बसे ।