Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 2 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 2

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 2
Shloka
गृहस्थस्तु यथा पश्येद्वलीपलितं आत्मनः। अपत्यस्यैव चापत्यं तदारण्यं समाश्रयेत्॥

Bhashya

Meaning
(गृहस्थः तु) गृहस्थ लोग (यदा) जव (आत्मन: वली पलितं पश्येत्) अपनी देह का चमड़ा ढीला और श्वेत केश होते हुए देखें (च) और (अपत्यस्य एव अपत्यम्) पुत्र का भी पुत्र हो जाये (तदा) तव (अरण्यं समाश्रयेत्) वन का आश्रय लेवे ॥२॥