Adhyay 6

Manusmriti

Shloka 12 Chapter Six

Adhyay 6
Shloka 12

Chapter Six

Subject: वानप्रस्थ - सन्यासधर्म विषय

97 Shloka
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Adhyay 6 Shloka 12
Shloka
देवताभ्यस्तु तद्धुत्वा वन्यं मेध्यतरं हविः। शेषं आत्मनि युञ्जीत लवणं च स्वयं कृतम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तत् मेध्यतरं वन्यं हविः देवताभ्यः हुत्वा) उस पवित्र वन के अन्नों से निर्मित हवि को देवताओं के लिए होम कर-आहुति देकर (शेषम्) शेष भोजन को (च) और (स्वयं कृतं लवरणम्) अपने लिए बनाये गये लवणयुक्त पदार्थों को (आत्मनि युञ्जीत) अपने खाने के लिए प्रयोग में लाये॥१२॥