Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 57 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 57

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 57
Shloka
प्रेतशुद्धिं प्रवक्ष्यामि द्रव्यशुद्धिं तथैव च। चतुर्णां अपि वर्णानां यथावदनुपूर्वशः॥

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Meaning
(चतुर्णाम् अपि वर्णानाम्) अब मैं चारों वर्गों की (अनुपूर्वंश:) क्रमश: [पहले] (प्रेतशुद्धिम्) मृत्यु के बाद की जाने वाली शुद्धि (च) और [फिर] (तथैव) उसी प्रकार चारों वर्गों के लिए (द्रव्यशुद्धिम्) पदार्थों की शुद्धि को (प्रवक्ष्यामि) कहूंगा-॥५७॥