Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 47 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 47

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 47
Shloka
यद्ध्यायति यत्कुरुते रतिं बध्नाति यत्र च। तदवाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किं चन॥

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Meaning
(यः) जो व्यक्ति (किंचन न हिनस्ति) किसी भी प्रारणी की हिंसा नहीं करता वह (यंत् ध्यायति) जिसका ध्यान करता है (यत् कुरुते) जिस काम को करता है (च) और (यत्र धृति बध्नाति) जहां धैर्य से मन लगाता है (तत्) उसको (अयत्नेन) सुगमता से (अवाप्नोति) प्राप्त कर लेता है॥४७॥