Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 46 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 46

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 46
Shloka
यो बन्धनवधक्लेशान्प्राणिनां न चिकीर्षति। स सर्वस्य हितप्रेप्सुः सुखं अत्यन्तं अश्नुते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो व्यक्ति (प्राणिनां वन्धन-वध-क्लेशान् न चिकीर्षति) प्राणियों के बन्धन में डालने, वध करने, उनको पीड़ा पहुँचाने की इच्छा नहीं करता (सः) वह (सर्वस्य हितप्रेप्सुः) सब प्राणियों का हितैषी (अत्यन्तं सुखम् प्रश्नुते) बहुत अधिक सुख को प्राप्त करता है॥४६॥