Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 45 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 45

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 45
Shloka
योऽहिंसकानि भूतानि हिनस्त्यात्मसुखेच्छया। स जीवांश्च मृतश्चैव न क्व चित्सुखं एधते॥

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Meaning
(यः) जो व्यक्ति (आत्मसुख + इच्छया) अपने सुख की इच्छा से (अहिंसकानि भूतानि) कभी न मारने योग्य प्राणियों की (हिनस्ति) हत्या करता (सः) वह (जीवन च मृतः) जीते हुए और मरकर भी (क्वचित् सुखं न एधते) भी सुख को प्राप्त नहीं करता॥४५॥