Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 25 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 25

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 25
Shloka
चिरस्थितं अपि त्वाद्यं अस्नेहाक्तं द्विजातिभिः। यवगोधूमजं सर्वं पयसश्चैव विक्रिया॥

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Meaning
(द्विजातिभिः) द्विजातियों को (यव-गोधूमजं सर्वम्) जौ और गेहूं से बने पदार्थ (च) तथा (पयस: विक्रिया एव) दूध के विकार से बने खोया, मिठाई आदि पदार्थ (अस्नेहाक्तम्) घृत आदि चिकनी वस्तु के मेल से न बने हों तो भी (चिरस्थितम् अपि) देर से बने हुए भी (आद्यम्) ख़ा लेने चाहिए॥२५॥