Adhyay 5
Shloka 166
Shloka
अनेन नारी वृत्तेन मनोवाग्देहसंयता। इहाग्र्यां कीर्तिं आप्नोति पतिलोकं परत्र च॥
Shloka 166 Chapter Five
Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय