Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 166 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 166

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 166
Shloka
अनेन नारी वृत्तेन मनोवाग्देहसंयता। इहाग्र्यां कीर्तिं आप्नोति पतिलोकं परत्र च॥

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Meaning
(अनेन विधिना) इस [४११ से ५११६८ तक] पूर्वोक्त विधि से रहते हुए (पञ्चयज्ञान् न हापयेत्) पंचयज्ञों को कभी न छोड़े मोर (आयुषः द्वितीयं भागम्) आयु के दूसरे भाग तक (कृतदारः) स्त्री-सहित (गृहे वसेत्) घर में निवास करे ॥१६९॥