Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 165 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 165

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 165
Shloka
पतिं या नाभिचरति मनोवाग्देहसंयुता। सा भर्तृलोकं आप्नोति सद्भिः साध्वीति चोच्यते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(या) जो स्त्री (मन:वाक्-देह-संयता) मन, वाणी और शरीर को संयम में रखकर (पति न अभिचरति) पति के विरुद्ध आचरण नहीं करती (सा) वह (भतृ लोकम् आप्नोति) पतिलोक अर्थात् पति के हृदय में आदर का स्थान प्राप्त करती है (च) और ('सद्भिः साध्वी' इति उच्यते) श्रेष्ठ लोग उसकी 'पतिव्रता या अच्छी पत्नी' कहकर प्रशंसा करते हैं ॥१६५॥