Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 163 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 163

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 163
Shloka
पतिं हित्वापकृष्टं स्वं उत्कृष्टं या निषेवते। निन्द्यैव सा भवेल्लोके परपूर्वेति चोच्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
[विवाह होने के बाद तुलनात्मक रूप में ] किसी अच्छे व्यक्ति के मिलने की संभावना होने पर (या अपकृष्टं पति हित्वा उत्कृष्टं पति निषेवते) जो स्त्री निम्न कुल या गुरणों वाले पति को छोड़कर उत्तम कुल या गुणों वाले पति का सेवन करती है (सा) वह (लोके निन्द्या एव भवेत्) लोगों में निन्दा ही प्राप्त करती है (च) और (परपूर्वा इति उच्यते) 'पहले इसका दूसरा पति था' यह उसके विषय में व्यंग्य किया जाता है॥१६३॥