Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 152 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 152

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 152
Shloka
मङ्गलार्थं स्वस्त्ययनं यज्ञश्चासां प्रजापतेः। प्रयुज्यते विवाहे तु प्रदानं स्वाम्यकारणम्॥

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Meaning
(विवाहेषु) विवाहों में (स्वस्त्ययनं च प्रजापतेः यज्ञः) जो स्वस्तिपाठ [= शुभकामना के लिए मन्त्रपाठ] और प्रजापति-यज्ञ किया जाता है वह (आसां मङ्गलार्थं प्रयुज्यते) इनके कल्याण की भावना से ही किया जाता है (प्रदानं स्वाम्यकारणम्) विवाह में स्त्रियों को पति के लिए सौंप देना ही इन पर पति का अधिकार होने का कारण है अर्थात् विवाह संस्कारपूर्वक जो स्त्री को पति के लिए दे दिया जाता है तो इस दान के पश्चात् ही उन पर पति का अधिकार हो जाता है, उससे पूर्व नहीं ॥१५२॥