Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 151 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 151

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 151
Shloka
यस्मै दद्यात्पिता त्वेनां भ्राता वानुमते पितुः। तं शुश्रूषेत जीवन्तं संस्थितं च न लङ्घयेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(पिता तु एनां यस्मै दद्यात्) पिता इस स्त्री को जिसे दे दे अर्थात् जिसके साथ विवाह करे (वा) अथवा (पितुः अनुमतेः भ्राता) पिता की सहमति से भाई जिससे विवाह कर दे (तं जीवन्तं शुश्रूषेत) उसकी जीते हुए सेवा करे (च) और (संस्थितं न लङ्घयेत्) मरने के बाद पतिव्रत धर्म का व्यभिचार आदि से उल्लंघन न करे ॥१५१॥