Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 150 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 150

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
5/150
Adhyay 5 Shloka 150
Shloka
सदा प्रहृष्टया भाव्यं गृहकार्ये च दक्षया। सुसंस्कृतोपस्करया व्यये चामुक्तहस्तया॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
स्त्री को योग्य हैं कि (सदा प्रहृष्टया) अतिप्रसन्नता से (गृहकार्येषु दक्षया) घर के कामों में चतुराई युक्त (सुसंस्कृत + उपस्करया) सब पदार्थों के उत्तम संस्कार, घर की शुद्धि (च) और (व्यये अमुक्तहस्तया भाव्यम्) व्यय में अत्यन्त उदार रहे । अर्थात् सब चीजें पवित्र और पाक इस प्रकार बनावे जो औौषधरूप होकर शरीरं वा आत्मा में रोग को न आने देवे । जो-जो व्यय हो उसका हिसाब यथावत् रखके पति आदि को सुना दिया करे। घर के नौकरचाकरों से यथायोग्य काम लेवे, घर के किसी काम को बिगड़ने न देवे ॥१५०॥