Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 149 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 149

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
5/149
Adhyay 5 Shloka 149
Shloka
पित्रा भर्त्रा सुतैर्वापि नेच्छेद्विरहं आत्मनः। एषां हि विरहेण स्त्री गर्ह्ये कुर्यादुभे कुले॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(स्त्री) कोई भी स्त्री (पित्रा भर्त्रा वा सुतैः अपि) पिता, पति अथवा पुत्रों से (आत्मनः विरहं न इच्छेत्) अपना विछोह - अलग रहने की इच्छा न करे (हि) क्योंकि (एषां विरहेण) इनसे अलग रहने से (उभे कुले गह्यं कुर्यात्) यह आशंका रहती है कि कभी कोई ऐसी बात न हो जाये जिससे दोनों-पिता तथा पति के कुलों की निन्दा या बदनामी हो जाये । अभिप्राय यह है कि स्त्री को सर्वदा पुरुष की सहायता अपेक्षित रखनी चाहिए, उसके बिना उसकी असुरक्षा की आशंका बनी रहती है ॥१४९॥