Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 126 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 126

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 126
Shloka
यावन्नापैत्यमेध्याक्ताद्गन्धो लेपश्च तत्कृतः। तावन्मृद्वारि चादेयं सर्वासु द्रव्यशुद्धिषु॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यावत्) जब तक (अमेध्य + अक्तात्) अशुद्ध वस्तु से (तत्कृतः गन्ध: च लेपः) उस अशुद्ध वस्तु की गन्ध और लेप [ = लगा होना] (न अपैति) नहीं दूर हो जाता है (सर्वासु द्रव्यशुद्धिषु) मिट्टी और जल से धोये जाने वाले सब पदार्थों की शुद्धि के लिए उन्हें (तावत्) तबतक (मृत् + वारि आदेयम्) मिट्टी और जल से धोते रहना चाहिए । १२६॥