Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 122 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 122

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 122
Shloka
प्रोक्षणात्तृणकाष्ठं च पलालं चैव शुध्यति। मार्जनोपाञ्जनैर्वेश्म पुनःपाकेन मृन्मयम्॥

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Meaning
(तृण-काष्ठं च पलालम्) घास, काष्ठ और पुआल से बने पदार्थ (प्रोक्षरणात् शुद्धयति) जल में डुबाकर पोंछने से शुद्ध होता है (वेश्म) घर की शुद्धि (मार्जन + उपाञ्जनः) धोने-बुहारने औौर लीपने से होती है (मृदु + मयं पुनः पाकेन) मिट्टी का पात्र या पदार्थं फिर आग में पकाने से शुद्ध होता है ॥१२२॥