Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 121 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 121

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 121
Shloka
क्षौमवच्छङ्खशृङ्गाणां अस्थिदन्तमयस्य च। शुद्धिर्विजानता कार्या गोमूत्रेणोदकेन वा॥

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1 Bhashyas
Meaning
(शंख-शृङ्गारणां अस्थि-दन्तमयस्य शुद्धि:) शंख, सींग, हड्डी, दांत, इन से बने पदार्थों की शुद्धि (विजानता) बुद्धिमान् व्यक्ति को (क्षौमवत्) छाल के वस्त्रों के समान (वा) अथवा (गोमूत्रेण + उदकेन) गोमूत्र और पानी से (कार्या) करनी चाहिए॥१२१॥