Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 119 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 119

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 119
Shloka
चैलवच्चर्मणां शुद्धिर्वैदलानां तथैव च। शाकमूलफलानां च धान्यवच्छुद्धिरिष्यते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(चर्मणां शुद्धिः चैलवत्) चमड़े के बर्तनों की शुद्धि वस्त्रों के समान होती है (वेदलानां तथैव) बांस के पात्रों की शुद्धि भी उसी प्रकार होती है (च) और (शाक-मूल-फलानां शुद्धिः धान्यवत् इष्यते) शाक, कन्दमूल और फलों की शुद्धि अन्नों के समान जल में धोने से होती है॥११९॥