Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 117 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 117

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 117
Shloka
चरूणां स्रुक्स्रुवाणां च शुद्धिरुष्णेन वारिणा। स्फ्यशूर्पशकटानां च मुसलोलूखलस्य च॥

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Meaning
[घृत आदि की चिकनाई लगे पात्रों की शुद्धि की विधि है-] (चरूरणां स्रुक्-स्र वाणां स्फ्य-शूर्पं- शकटानां च मुसल + उलूखलस्य शुद्धिः) चरु, स्रुक्, स्रुष, स्फ्य, छाज, शकट और मूसल- ऊखल नामक यज्ञपात्रों की शुद्धि (उष्णेन वारिणा) गर्म जल से धोने से होती है॥११७ ।।