Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 115 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 115

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

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Adhyay 5 Shloka 115
Shloka
द्रवाणां चैव सर्वेषां शुद्धिरुत्पवनं स्मृतम्। प्रोक्षणं संहतानां च दारवाणां च तक्षणम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(सर्वेषां द्रवाणाम्) सब घी, तैल आदि द्रव पदार्थों की (शुद्धिः) शुद्धि (उत्पवनम्) छान लेने से (च) और (संहतानां प्रोक्षणम्) ठोस वस्तु जैसे लकड़ी की चौकी आदि की पोंछने से (च) तथा (दारवाणाम् तक्षणम्) लकड़ी के पार्थों की शुद्धि छीलने से (स्मृतम्) मानी है॥११५॥