Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 112 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 112

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 112
Shloka
निर्लेपं काञ्चनं भाण्डं अद्भिरेव विशुध्यति। अब्जं अश्ममयं चैव राजतं चानुपस्कृतम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(निर्लेपम्) जिसमें किसी चिकनाई झूठन आदि का लेप न लगा हो ऐसा (काञ्चनम् भाण्डम्) सोने का पात्र (अब्जम्) जल में उत्पन्न होने वाले मोती. शंख आदि से बना पात्र (च) और (अश्ममयम्) पत्थरों के पात्र (अनुपस्कृतं राजतम्) चित्रकारी की खुदाई से रहित चांदी का पात्र (अद्भिः एव विशुद्धयति) केवल जल से ही शुद्ध हो जाता है॥११२॥