Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 111 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 111

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 111
Shloka
तैजसानां मणीनां च सर्वस्याश्ममयस्य च। भस्मनाद्भिर्मृदा चैव शुद्धिरुक्ता मनीषिभिः॥

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Meaning
(तैजसाम्) तैजस पदार्थ अर्थात् चमकीले सोना आदि की (च) और (मणीनाम्) मणियों के पात्रों की (च) और (सर्वस्य अश्ममयस्य) सब प्रकार के पत्थरों के पात्रों की (शुद्धिः) शुद्धि (मनीषिभिः) विद्वानों ने (भस्मना अद्भिः च मृदा एव उक्ता) भस्म = राख, जल, और मिट्टी से कही है॥१११॥