Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 109 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 109

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 109
Shloka
अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति मनः सत्येन शुध्यति। विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति॥

Bhashya

Meaning
(अभिः गात्राणि शुद्धयन्ति) जल से शरीर के बाहर के अवयव (सत्येन मनः) सत्याचरण से मन: (विद्यातपोभ्यां भूतात्मा) विद्या और तप अर्थात् सब प्रकार के कष्ट भी सहके धर्म ही के अनुष्ठान करने से जीवात्मा (ज्ञानेन बुद्धिः शुद्धपति) ज्ञान अर्थात् पृथिवी से लेके परमेश्वर पर्यन्त पदार्थों के विवेक से बुद्धि दृढ़ निश्चय पवित्र होती है ॥१०९॥