Adhyay 5

Manusmriti

Shloka 107 Chapter Five

Adhyay 5
Shloka 107

Chapter Five

Subject: गृहस्थान्तार्गत - भक्ष्याभक्ष्य - देहशुद्धि - द्रव्यशुद्धि - स्त्रीधर्म विषय

169 Shloka
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Adhyay 5 Shloka 107
Shloka
क्षान्त्या शुध्यन्ति विद्वांसो दानेनाकार्यकारिणः। प्रच्छन्नपापा जप्येन तपसा वेदवित्तमाः॥

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Subject
पदार्थों से शुद्धि
Meaning
क्षान्त्या शुद्धचन्ति विद्वांसो दानेनाकार्यकारिणः । प्रच्छन्नपापा जप्येन तपसा वेदवित्तमाः॥१०७॥(१६) (विद्वांसः क्षान्त्या) विद्वान् लोग क्षमा से (अकार्यकारिणः दानेन) दुष्टकर्मकारी सत्संग और विद्यादि शुभगुणों के दान से (प्रच्छन्नपापा जप्येन) गुप्त • पाप करने हारे विचार से त्याग कर (तपसा वेदवित्तमाः) और बह्मचर्य तथा सत्यभाषणादि से वेदवित् उत्तम विद्वान् (शुध्यन्ति) शुद्ध होते हैं ॥१०७॥