Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 93 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 93

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 93
Shloka
उत्थायावश्यकं कृत्वा कृतशौचः समाहितः। पूर्वां संध्यां जपंस्तिष्ठेत्स्वकाले चापरां चिरम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
संध्योपासन आदि नित्यचर्या का पालन एवं उससे दीर्घायुं की प्राप्ति
Meaning
(उत्थाय) उठकर (आवश्यकं कृत्वा) दिनचर्या के आवश्यक कार्य सम्पन्न करके (कृतशौचः) स्वच्छ पवित्र होकर (समाहितः) एकाग्रचित्त होकर (पूर्वी संध्यां जपन् चिरं तिष्ठेत्) प्रातःकालीन संध्योपासना करने के लिए देर तक बैठे (च) और (स्वकाले) उपयुक्त समय पर (अपराम) सायंकालीन संध्या में भी उपासना करे॥९३॥