Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 69 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 69

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
4/69
Adhyay 4 Shloka 69
Shloka
बालातपः प्रेतधूमो वर्ज्यं भिन्नं तथासनम्। न छिन्द्यान्नखरोमाणि दन्तैर्नोत्पाटयेन्नखान्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
सज्जनगृहस्थ लोगों को योग्य है कि (न पतितः, न अन्त्यः, न चांडाल :, न पुल्कस:) जो पतित, दुष्टकर्म करने हारे हों न उनके, न चांडाल, न कंजर (न मूर्खे: श्रवलिप्तैः च न अन्त्य + अवसायिभिः संवसेत्) न मूर्ख, न मिथ्याभिमानी, और न नीच निश्चय वाले मनुष्यों के साथ कभी निवास करें॥७९॥