Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 68 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 68

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 68
Shloka
विनीतैस्तु व्रजेन्नित्यं आशुगैर्लक्षणान्वितैः। वर्णरूपोपसंपन्नैः प्रतोदेनातुदन्भृशम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(विनीतैः) सिखाये हुए (लक्षण+अन्वितैः) सुन्दर लक्षणों से युक्त (वर्णं-रूप+उपसंपन्नैः) सुन्दर रंग-रूप से युक्त (आशुगः) शीघ्रगामी पशुओं से (प्रतोदेन भृशम् अतुदन्) चाबुक की मार से बहुत पीड़ा न देता हुआ (व्रजेत्) सवारी करे॥६८॥