Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 67 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 67

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 67
Shloka
नाविनीतैर्भजेद्धुर्यैर्न च क्षुध्व्याधिपीडितैः। न भिन्नशृङ्गाक्षिखुरैर्न वालधिविरूपितैः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अविनीतः) बिना सिखाये हुए (क्षुद्-व्याधि-पीडितः) भूख और रोग से पीड़ित (भिन्न-शृंग-प्रक्षि-खुर:) जिनके सींग, नेत्र और खुर टूट गये हैं (वालधिविरूपितैः) जिनकी पूंछ कटी या घायल हो, ऐसे (धुर्यैः न व्रजेत्) घोड़े, बैल आदि पशुओं पर चढ़कर न जाये॥६७ ।।