Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 40 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 40

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 40
Shloka
नोपगच्छेत्प्रमत्तोऽपि स्त्रियं आर्तवदर्शने। समानशयने चैव न शयीत तया सह॥

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1 Bhashyas
Subject
रजस्वलागमन-निषेध एवं उससे हानि लाभ
Meaning
(प्रमत्तः अपि) कामातुर होता हुआ भी (आर्तवदर्शने) मासिक धर्म के ८. दिनों में (स्त्रियं न उपगच्छेत्) स्त्री से उपभोग न करे (च) और (तथा सह समानशयने न शयीत) उसके साथ एक बिस्तर पर न सोये॥४०॥