Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 32 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 32

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 32
Shloka
शक्तितोऽपचमानेभ्यो दातव्यं गृहमेधिना। संविभागश्च भूतेभ्यः कर्तव्योऽनुपरोधतः॥

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1 Bhashyas
Subject
भिक्षा एवं बलिवैश्वदेव का विधान
Meaning
(गृहमेघिना) गृहस्थी को (शक्तितः अपचमानेभ्यः) अपने हाथ से जो पका नहीं सकते हैं, ऐसे ब्रह्मचारी, संन्यासी आदि को (दातव्यम्) अन्न देना चाहिए (च) और (अनुपरोधतः) जिससे परिवार के भरण-पोषण में बाधा न पड़े इस प्रकार (भूतेभ्य: संविभागः कर्त्तव्यः) प्राणियों-असहाय, विकलांगादि मनुष्यों • तथा कुत्ता, पक्षी आदि के लिये भोजन का भाग भी निकालना चाहिए॥३२॥