Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 31 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 31

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 31
Shloka
वेदविद्याव्रतस्नाताञ् श्रोत्रियान्गृहमेधिनः। पूजयेद्धव्यकव्येन विपरीतांश्च वर्जयेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(वेदविद्याव्रतस्नातान्) वेदों के विद्वान, ज्ञानी और जो ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करके स्नातक बने हैं ऐसे (श्रोत्रियान् गृहमेधिनः) वेदपाठी पिता-माता आदि गृहपतियों का (हव्यकव्येन) देय पदार्थों और भोजन आदि से (पूजयेत्) सत्कार करे (विपरीतान् च वर्जयेत्) और जो इनसे विपरीत हैं उन्हें छोड़दे॥३१॥