Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 30 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 30

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
4/30
Adhyay 4 Shloka 30
Shloka
पाषाण्डिनो विकर्मस्थान्बैडालव्रतिकाञ् शठान्। हैतुकान्बकवृत्तींश्च वाङ्गात्रेणापि नार्चयेत्॥

Bhashya

Subject
सत्कार के अयोग्य व्यक्ति
Meaning
(पाखण्डिनः) पाखण्डी (विकर्मस्थान) वेदों की आज्ञा के विरुद्ध चलने वाले (बैडालव्रतिकान्) विडालवृत्ति वाले (शठान्) हठी (हैतुकान्) बकवादी (च) और (बकवृत्तीन्) बगुलाभक्त मनुष्यों का (वाङ्मात्रेण अपि न अर्चयेत्) चारणी से भी सत्कार नहीं करना चाहिए॥३०॥