Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 29 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 29

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 29
Shloka
आसनाशनशय्याभिरद्भिर्मूलफलेन वा। नास्य कश्चिद्वसेद्गेहे शक्तितोऽनर्चितोऽतिथिः॥

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Subject
अतिथिसत्कार का विधान
Meaning
(अस्य गेहे) इस गृहस्थी के घर में (कश्चित् अतिथिः) कोई भी अतिथि (शक्तित:) शक्ति के अनुसार (आसन + प्रशनशय्याभिः) आसन, भोजन, बिछौना आदि से (वा) अथवा (अद्भ:-मूल-फलेन) जल, कन्दमूल और फल आदि से (नचितः न वसेत्) बिना सत्कार किये न रहे अर्थात् यथाशक्ति सब का सत्कार करना चाहिये॥२९॥